अफवाह के कारण राजनीति रही ज़बरदस्त हावी
मुज़फ्फरनगर
जनपद में कई दिनों से गौकशी व अवैध मीट कटान और गौकशो के साथ मुठभेड़ के मामले आये दिन बढ़ते जा रहे हैं। लगातार होती मुठभेड़ों के बावजूद भी गौकशी करने वाले आरोपियों के मन में पुलिस का खौफ पैदा नहीं हो पाया है। लेकिन मात्र लोकडाउन में ही गौवंश इतने असुरक्षित कैसे हो सकते हैं जिस समय प्रत्येक चौराहे पर पुलिसकर्मियों द्वारा एक एक वाहन की जांच एवं आते जाते व्यक्ति की गहनता से पूछताछ की जा रही हो? इसके अलावा मात्र कुछ ही समय में सिर्फ गौकशी के मामलों में ही पूरे जनपदभर के अधिकांश थाना क्षेत्रों में इज़ाफ़ा हुआ है? आइये इन सभी सवालों पर एवं उनके सुझावों पर प्रकाश डालते हैं।
अचानक गौकशी के मामलों में हुआ इज़ाफ़ा
अगर देखा जाए तो जनपद के अधिकांश थाना क्षेत्रों में गोकशी के मामले दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहे हैं। साथ ही गोकशी के आरोपी बेखौफ होकर गौकशी कर रहे हैं और पुलिस पर लगातार हमले कर रहे हैं। और पुलिस जवाब में आरोपियों को पीतल चखा रही है। लेकिन लगातार गौकशी के आरोपियों में इतना दुस्साहस होना स्वाभाविक कहना गलत होगा। कहीं न कहीं इसके पीछे एक बड़ा कारण हो सकता है।
राजनीति के कारण बढ़ रहे गौकशी के मामले
पूर्व में मुज़फ्फरनगर प्रशासन द्वारा चिकन बिक्री के लिए होम डिलीवरी की सुविधा जारी कर दी गई थी। लेकिन राजनीतिकरण के कारण प्रशासन को कुछ ही समय बाद अपना फैसला वापस लेना पड़ा और मुजफ्फरनगर में दोबारा चिकन की बिक्री नहीं हो पाई। उक्त मामले में एक जनप्रतिनिधि द्वारा राजनीति दर्शाने का मौका पाया गया था। जिसमें चिकन बंदी कराने के लिए थोड़ी राजनीति सफल साबित हुई थी।आगे चलकर वे अपने मंसूबे में सफल हो पाए थे। यदि मुजफ्फरनगर प्रशासन द्वारा समय रहते हैं चिकन की बिक्री लोकडाउन के पालन के साथ जारी कर दी जाती तो शायद अवैध मीट कटान के मामले प्रकाश में कभी न आते और न ही इस प्रकार के मामलों में इज़ाफ़ा होता।
इस बार भी अफवाह प्रथम स्थान पर
आपको बता दें कि कोरोना वायरस के चलते फेली कई तरह की अफवाहों की चपेट में मुज़फ्फरनगर भी आ गया। क्योंकि हमारे देश में हमेशा से ही अफवाह फैलाने वाले जीव जंतुओं को अधिक सम्मान दिया जाता है। प्रत्येक गांव में कुछ लोग ऐसे मिलेंगे जिन्होंने चुड़ैल के साथ बीड़ी का सेवन कर रखा हो। ऐसा करने से उनको चाय की दुकानों पर व्यतीत करने के लिए लंबा समय एवं कुछ फ्री की चाय भी मिल जाती है। लोकडाउन से पहले ही एक भ्रामक अफवाह फैलाई जा रही थी जिसमें अंडा एवं मुर्गा मछली आदि खाने से करोना का संक्रमण बढ़ाने के दावे किए जा रहे थे। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने देशभर के समस्त जिलाधिकारियों से अपील करते हुए बयान दिया था कि किसी भी जनपद में अंडा मांस मछली पर प्रतिबंध न लगाएँ। यह मात्र अफवाह है कि अंडा मांस मछली आदि खाने से कोरोना फैलता है। शायद मुज़फ्फरनगर के उक्त जनप्रतिनिधि ने उसी अफवाह पर अमल लाते हुए चिकन की होम डिलीवरी बंद करवाने की सलाह दी हो। मगर इसका कारण राजनीति भी हो सकती है। प्रतिबंध के बाद हम पाएंगे कि लोकडाउन के कारण कई क्षेत्रों में ब्लैक में मीट बिक रहा है। लोग चोरी छिपे चिकन आदि काट रहे हैं और मछलियां बेच रहे हैं मगर सख्ती होने के कारण पुलिस को उन लोगों पर भी शिकंजा कसना पड़ा। जिसके चलते अवैध मीट कटान या कहें कि गौकशी करने वाले लोग एक्टिव हो गए। हाल ही में पुरकाजी थानाक्षेत्र के जंगल में गौवंश के अवशेष बरामद हुए थे। जिससे स्पष्ट होता है कि गौकशी करने वाले गौकशी के लिए जंगलों के सहारा ले रहे हैं। वे जंगलों में अवैध कटान करके सभी अवशेषों (वेस्टेज) को जंगलों में ही छोड़ देते हैं और ब्लैक में उक्त मीट को कटरे का मीट बताकर बेच रहे हैं। इसलिए जनपदभर के कई थानाक्षेत्रों के जंगलों में गौकशी एवं मुठभेड़ के मामले आम होते गए।
राजनीति और अफवाह के कारण लाखों रुपये का नुकसान
"कोरोना वायरस अंडा मांस मछली आदि खाने के कारण फैल रहा है" इस प्रकार की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बिना पुष्टि किये लोग इस अफवाह की चपेट में आते गए। जिसका खंडन करते हुए केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कई बयान दिए और देश भर के जिला अधिकारियों से निवेदन किया कि किसी भी सूरत में अंडा मांस मछली आदि पर प्रतिबंध न लगाएं। लेकिन मुजफ्फरनगर की राजनीति थोड़ी अलग है। इस अफवाह को केंद्रित बनाते हुए एक जबरदस्त राजनीति की गई, जिसके कारण मुजफ्फरनगर में पोल्ट्री फार्म व फिश फार्मिंग करने वाले किसानों को लाखों - करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ। इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि पोल्ट्री फार्म मैं मौजूद चिकन को गड्ढे खोदकर जिंदा दफनाया गया सड़क पर फेंका गया यहां तक कि जंगलों में भी जिंदा चिकन फेका गया पोल्ट्री एवं फिश फार्मिंग कर रहे किसानों ने इस अफवाह और राजनीति के कारण अपनी लाखों-करोड़ों रुपए के नुकसान की मार झेली है। यदि इस तरह की अफवाहें आम होती रही तो पोल्ट्री एवं फिश फार्मिंग का व्यवसाय कर रहे किसानों का जीना तबाह व बर्बाद हो जाएगा और राजनीति करने वाले उसका लुफ्त उठाएंगे। इसी प्रकार गौकशी के मामलों में बढ़ोतरी होती रहेगी। अब देखना है कि गौकशी पर अंकुश लगाया जाएगा या लगातार मुठभेड़ों में अपने नंबर बढ़ाने का प्रयास किया जाता रहेगा।