पुलवामा हमले के शहीद का परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में एक जवान का परिवार अधूरे वादों के पूरा होने के इंतज़ार में है. वाराणसी के तोफ़ापुर गांव के रहने वाले रमेश यादव की 14 फ़रवरी, 2019 को पुलवामा में हुए चरमपंथी हमले में मौत हो गई थी. रमेश यादव की मौत के बाद उनके गांव पहुंचे मंत्रियों और सरकार के अधिकारियों ने कई वादे किये थे. इन वादों में रमेश की पत्नी और बड़े भाई को नौकरी, जर्जर मकान की मरम्मत, स्मृति द्वार, स्मारक, सड़क जैसे वादे शामिल थे.इनमें से कुछ वादे पूरे भी हुए लेकिन अधिकतर अभी भी अधूरे हैं. पुलवामा हमला 2019 के लोकसभा चुनावों में एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरा था. इस चरमपंथी हमले को सत्ताधारी बीजेपी ने लोकसभा चुनावों में एक बड़ा मुद्दा बनाया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली एनडीए की सरकार ने सत्ता में वापसी भी की. सरकार की तरफ़ से रमेश की विधवा हो चुकीं पत्नी रीनू यादव को वाराणसी के डीएम ऑफिस में नौकरी दी जा चुकी है. वो इस दबाव में ज़्यादा कुछ बोलने से बचती हैं.