पश्चिम बंगाल
शनिवार को तृणमूल कांग्रेस पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में किए जा रहे प्रदर्शनों के दौरान मारे गए मोहम्मद जलील और नौशीन के घरों का दौरा किया. मोहम्मद जलील और नौशीन की मौत पुलिस की गोली से हुई थी. पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने बुंडेर पुलिस स्टेशन पर हमला कर दिया था जिस कारण उन्हें गोली चलानी पड़ी. मृतकों के परिजनों से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में टीएमसी के सांसद दिनेश त्रिवेदी और नदीमुल्ला हक़ शामिल थे. दोनों ने उन लोगों से भी मुलाक़ात की जो ज़ख़्मी हैं और इलाज के लिए फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं. दिनेश त्रिवेदी ने बीबीसी से कहा, "हम जो कुछ कर रहे हैं, मानवीय दृष्टिकोण से कर रहे हैं, इसमें कोई राजनीति नहीं है. यहां बीजेपी सरकार ने मुआवज़े का एलान किया मगर दिया नहीं. यह ज़ख़्मों पर नमक डालने जैसा है. जबकि ममता बनर्जी सबके साथ खड़ी होती हैं."
क्या बोले मृतकों के परिजन
मृतकों के परिजनों ने बीबीसी से कहा कि उनसे मिलने आए नेताओं ने सांत्वना दी और गंभीरता से उनकी बात सुनी. घटना वाले दिन को याद करते हुए जलील के भाई मोहम्मद याहिया ने कहा, "मेरा भाई पास की मछली मार्किट में दिहाड़ी मज़दूरी का काम करत था. दोपहर बाद वो घर आया, उसने अपने बच्चे घर पर छोड़े और नमाज़ के लिए बगल वाली मस्जिद की ओर चला गया. ये सब साढ़े चार-पांच बजे हुआ. ये जगह ज़्यादा दूर नहीं है. मुझे नहीं पता क्यों उस पर गोली चलाई गई." नौशीन के भाई नौफ़ान ने बताया, "नौशीन वेल्डिंग शॉप पर काम कर रहा था. उसके मालिक ने उसे मस्जिद जाने के लिए कहा और वापस लौटने के लिए मना भी किया क्योंकि वहीं पास में कोई झगड़ा हुआ था. मस्जिद जाने के रास्ते में उसकी मौत हो गई."
नौफ़ान कहते हैं, "हां, हमें पैसा मिला है. लेकिन हम इंसाफ़ चाहते हैं. पैसा अहम नहीं है. जब हम अपने मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा से मिले तो हमने उनसे भी साफ़ तौर पर कहा कि हमें इंसाफ़ चाहिए. मुआवज़ा दिया जाएगा, ये बात तो उन्होंने कही थी." याहिया ने बताया कि उनके भाई की माली हालत ठीक नहीं थी. उन्होंने कहा, "हां, मुख्यमंत्री जी ने ये तो कहा है कि वो मुआवज़ा देंगे लेकिन हम नहीं जानते कि उसके बाद क्या हुआ?"